Hartalika Teej हरियाली तीज क्या है और कब मनाई जाती है?

Join Telegram
Join Now

भारत त्योहारों का देश है, और यहाँ हर मौसम, हर महीने का अपना एक विशेष पर्व होता है। इन्ही में से एक बेहद खूबसूरत और पवित्र त्योहार है 'हरियाली तीज'। सावन का महीना आते ही प्रकृति एक नई ऊर्जा से भर जाती है, और इसी मनमोहक मौसम में हरियाली तीज का आगमन होता है। यह त्योहार विशेष रूप से महिलाओं के लिए असीम उमंग, उल्लास और श्रृंगार का प्रतीक है।



हरियाली तीज, जिसे 'श्रावणी तीज' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास (सावन) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व आमतौर पर जुलाई या अगस्त के महीने में आता है।

​इस समय तक मानसून भारत में पूरी तरह से सक्रिय हो चुका होता है। बारिश की फुहारों से तपती धरती को ठंडक मिलती है, चारों ओर हरियाली छा जाती है, और इसी प्राकृतिक सौंदर्य का जश्न मनाने के लिए इसे 'हरियाली तीज' का नाम दिया गया है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत—विशेषकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

​हरियाली तीज का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

​हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और उनके पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है।

  • सुहागिन महिलाओं के लिए: सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, और सुख-समृद्धि के लिए 'निर्जला व्रत' (बिना पानी पिए) रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है।
  • कुंवारी कन्याओं के लिए: कुंवारी कन्याएं भी अच्छे और मनवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • प्रकृति के प्रति आभार: यह त्योहार हमें प्रकृति के करीब ले जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली हमें पर्यावरण के प्रति प्रेम और उसके संरक्षण का संदेश देती है।

​हरियाली तीज की पौराणिक व्रत कथा

​किसी भी हिंदू पर्व की तरह हरियाली तीज भी एक गहरी पौराणिक कथा से जुड़ी है। शिव पुराण के अनुसार, यह वही पवित्र दिन है जब भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।



​कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर घोर तपस्या की। अन्न-जल का त्याग कर दिया और सूखे पत्ते खाकर दिन बिताए। माता पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए 107 जन्म लिए, लेकिन हर बार वे उन्हें पाने में असफल रहीं। अंततः अपने 108वें जन्म में, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को, उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।

​तभी से यह मान्यता है कि जो भी स्त्री इस दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की पूजा करती है, उसके वैवाहिक जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।

​पूजा की सामग्री और संपूर्ण पूजा विधि

​हरियाली तीज की पूजा विधि-विधान से करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।

​पूजा सामग्री:

  • ​काली मिट्टी या बालू रेत (शिव-पार्वती की मूर्ति बनाने के लिए)
  • ​बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते
  • ​माता पार्वती के लिए सोलह श्रृंगार का सामान (हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, लाल चुनरी, आलता, आदि)
  • ​फल, फूल, मिठाई (विशेषकर घेवर)
  • ​देसी घी, दीपक, कपूर, और धूपबत्ती

​पूजा विधि (चरण-दर-चरण):

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से हरे या लाल रंग के) धारण करें। इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  2. मंडप और मूर्ति निर्माण: घर के मंदिर या किसी साफ जगह पर चौकी लगाएं। उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की छोटी सी प्रतिमा बनाएं।
  3. श्रृंगार अर्पण: माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। यह सुहाग का प्रतीक है। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाएं।
  4. कथा वाचन: हाथों में फूल और अक्षत लेकर हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  5. आरती और क्षमा प्रार्थना: कथा के बाद शिव-पार्वती और गणेश जी की आरती करें। अपनी मनोकामना मांगें और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।
  6. पारण: अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद ही व्रत खोला (पारण किया) जाता है।

​परंपराएं और रीति-रिवाज: त्योहार का उल्लास

​हरियाली तीज केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई खूबसूरत सांस्कृतिक परंपराएं भी जुड़ी हैं:

  • हरे रंग का महत्व: इस दिन महिलाएं हरे रंग की साड़ियां, लहंगे और हरी चूड़ियां पहनती हैं। हरा रंग प्रकृति, समृद्धि और सुहाग का प्रतीक माना जाता है।
  • मेहंदी लगाना: तीज के अवसर पर हाथों और पैरों में सुंदर मेहंदी रचाना एक अनिवार्य और शुभ परंपरा है।
  • झूला झूलना और मल्हार गाना: बागों और पार्कों में पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं। महिलाएं एकत्र होकर झूला झूलती हैं और सावन के पारंपरिक गीत (मल्हार और कजरी) गाती हैं।
  • मायके से 'सिंधारा': इस अवसर पर नवविवाहित लड़कियों के मायके से उनके ससुराल 'सिंधारा' भेजा जाता है। इसमें कपड़े, गहने, श्रृंगार का सामान, मेहंदी और मिठाइयां (घेवर, फेनी) शामिल होती हैं।
  • घेवर की मिठास: सावन और तीज का जिक्र हो और 'घेवर' की बात न हो, ऐसा असंभव है। घेवर इस मौसम की सबसे प्रमुख और स्वादिष्ट मिठाई है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते और बांटते हैं।

​हरियाली तीज आमवस्या संस्कृति के लिए है खास

​हरियाली तीज भारतीय संस्कृति की उस समृद्ध विरासत का हिस्सा है, जो हमें हमारे परिवार, समाज और प्रकृति के साथ जोड़ती है। यह त्योहार महिलाओं के असीम प्रेम, समर्पण और त्याग को सम्मान देने का दिन है। एक ओर जहाँ यह भगवान शिव और माता पार्वती के ईश्वरीय प्रेम का स्मरण कराता है, वहीं दूसरी ओर यह हमें बारिश की बूंदों और प्रकृति की हरियाली के बीच जीवन की नई शुरुआत करने का अवसर भी देता है।




​आप सभी को इस पावन और खूबसूरत हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं! भगवान शिव और माता पार्वती आपके जीवन को सदैव सुख, शांति और हरियाली से भरा रखें।

Post a Comment

To be published, comments must be reviewed by the administrator *

Previous Post Next Post
Post ADS 1
Post ADS 1