15 सितंबर को रायपुर प्रेस क्लब में छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक ऐतिहासिक और अनूठा वाकया देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के मुद्दे पर राज्य के वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक ही मंच पर खुली बहस (Open Debate) के लिए आमने-सामने आए। लगभग 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस बहस में दोनों नेताओं ने अपने-अपने आंकड़े, तर्क और आरोप-प्रत्यारोप पेश किए।
यहाँ इस पूरी बातचीत, उसके पीछे के तर्कों और सच्चाई का विस्तृत स्टेप-बाय-स्टेप विश्लेषण दिया गया है:
1. बहस की पृष्ठभूमि और शुरुआत
पिछले कुछ समय से राज्य में प्रधानमंत्री आवास को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी चल रही थी। विजय शर्मा ने भूपेश बघेल को इस मुद्दे पर खुले मंच पर बहस की चुनौती दी थी, जिसे बघेल ने स्वीकार कर लिया। प्रेस क्लब में जब बहस शुरू हुई, तो मुख्य विवाद मकानों की स्वीकृति, उनके निर्माण, और केंद्र-राज्य के बीच फंड के बंटवारे को लेकर था।
2. आंकड़ों की जंग: किसने क्या तर्क दिया?
विजय शर्मा (उपमुख्यमंत्री, भाजपा) के तर्क:
- भाजपा की उपलब्धि: शर्मा ने कहा कि भाजपा की साय सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट में 18 लाख पीएम आवास बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने अब तक 17 लाख 75 हजार आवास पूर्ण किए हैं और 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने देश में सबसे ज्यादा पीएम आवास बनाए हैं।
- कांग्रेस पर आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 5 साल में केवल 3,900 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी और मात्र 3 लाख आवास बनाए, जबकि भाजपा सरकार ने ढाई साल में 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
- टीएस सिंहदेव का इस्तीफा: शर्मा ने याद दिलाया कि भूपेश बघेल की सरकार में पंचायत मंत्री रहे टीएस सिंहदेव ने इसी बात पर इस्तीफा दे दिया था कि राज्य सरकार गरीबों के मकान के लिए अपना हिस्सा (राज्यांश) नहीं दे रही थी।
भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस) के तर्क:
- कांग्रेस सरकार के आंकड़े: बघेल ने कहा कि उनकी सरकार ने करीब 7 लाख (6 लाख 97 हजार) आवास स्वीकृत किए थे। उन्होंने साल-दर-साल के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2018 में 3,48,960 घर स्वीकृत हुए, जिनमें से 1,39,000 पूरे हुए।
- आंकड़ों में फर्जीवाड़े का आरोप: बघेल ने भाजपा के '18 लाख आवास' के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा पहले ही 18 लाख मकान स्वीकृत कर चुकी है, तो हाल ही में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए सिरे से लाखों मकानों की स्वीकृति कैसे दी? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सारे आंकड़े जोड़ दिए जाएं, तो यह संख्या 46 लाख तक पहुंच जाएगी, जो कि गुमराह करने वाली बात है।
3. सबसे बड़ा विवाद: पोर्टल बंद होना और कोरोना काल का फंड
भूपेश बघेल का पक्ष: बघेल ने तर्क दिया कि कोरोना काल में राज्य की आर्थिक स्थिति खराब थी और वेतन देने तक के पैसे नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने RBI से लोन लेकर आवास योजना के लिए पैसा दिया। उनका सबसे बड़ा आरोप यह था कि केंद्र सरकार ने 2022-23 में PM आवास योजना का पोर्टल ही बंद कर दिया था और राज्य का 8 हजार करोड़ रुपया रोक लिया, जिसके कारण गरीबों के खाते में पैसे नहीं जा सके।
विजय शर्मा का पलटवार: शर्मा ने पोर्टल बंद होने के दावे को सिरे से झूठा बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी केंद्र से पैसे आ रहे थे और बंगाल, राजस्थान जैसे अन्य राज्यों ने मकान बनाए। शर्मा का तर्क था कि असली समस्या यह थी कि बघेल ने कहा था, "यह प्रधानमंत्री आवास है, तो इसका पूरा खर्च प्रधानमंत्री (केंद्र) ही उठाएं।" शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर पोर्टल पर जानकारी अपलोड नहीं की और अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र पर फोड़ दिया।
4. राजनीतिक सच्चाई
- जनता की सजा: बहस के दौरान एक मौका ऐसा भी आया जब भूपेश बघेल ने यह स्वीकार किया कि यदि उनकी सरकार ने मकान नहीं बनाए, तो जनता ने उन्हें चुनाव में सत्ता से बाहर करके इसकी सजा दे दी है।
- तकनीकी पेंच (सच्चाई): इस पूरी बयानबाजी के पीछे की तकनीकी सच्चाई यह है कि 'पीएम आवास योजना' में केंद्र और राज्य दोनों को अपना-अपना हिस्सा (क्रमशः 60% और 40%) देना होता है। कांग्रेस शासनकाल में वित्तीय संकट के चलते राज्य सरकार अपना हिस्सा (राज्यांश) समय पर नहीं दे पाई थी, जिसके कारण केंद्र से मिलने वाली किस्तें रुक गई थीं। यही कारण था कि तत्कालीन पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने इस्तीफा दिया था। दूसरी ओर, भाजपा सरकार अपने '18 लाख मकानों के संकल्प' को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, हालांकि यह केवल संकल्प है और इसमें से कई मकान अभी निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।
5. सोशल मीडिया पर वॉर (बहस के बाद)
बहस ख़त्म होने के बाद यह लड़ाई सोशल मीडिया (X) पर आ गई।
- भूपेश बघेल ने ट्वीट किया, "अगली बार किसी समझदार को भेजना, 'छोटा रिचार्ज' रील के लिए ही ठीक है।"
- विजय शर्मा और भाजपा ने पलटवार करते हुए बघेल को "घोटालेबाज" कहा और लिखा कि जो गरीबों के आवास पर राजनीति करते हैं, उन्हें आवास के आंकड़े तक नहीं पता।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी नीतिगत मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के दो शीर्ष नेताओं के बीच इस तरह की डेटा-आधारित 'ओपन डिबेट' छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार हुई है।


भूपेश बघेल ने ट्वीट किया, "अगली बार किसी समझदार को भेजना, 'छोटा रिचार्ज' रील के लिए ही ठीक है।"
ReplyDeleteविजय शर्मा और भाजपा ने पलटवार करते हुए बघेल को "घोटालेबाज" कहा और लिखा कि जो गरीबों के आवास पर राजनीति करते हैं, उन्हें आवास के आंकड़े तक नहीं पता।
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